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परमात्मा ने किया, नारी के साथ पक्षपात

Posted On: 14 Oct, 2010 Others में

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परमात्मा ने भी नारी के साथ किया पक्षपात

विषय अटपटा एवं अति-संवेदनशील एवं गंभीर है,साथ ही ऐसे विचारों को नास्तिकता से जोड़ा जा सकता है,परमात्मा पर आरोप या प्रश्न चिन्ह लगाना किसी भी लेखक के लिए आत्महान्तक प्रयास हो सकता है,परन्तु फिर भी अपनी अंतरात्मा और अनुभूति,मानसिक चेतना को दवाना भी मानवीय चेतना के लिए कष्टकारी होता है,सो विषय पर लेख प्रस्तुत है-

अगले जनम में,मोहे बिटिया ही दीजियो…………?

मैंने सुना है,कि महान अन्तरिक्ष विज्ञानी,और विचारक “गैलिलियो गैलिली ” ने दूरवीन के आविष्कार करने के बाद,अन्तरिक्ष में झांककर जब दुनिया को ये बताया कि- ” सूर्य पृथ्वी के चारो ओर नहीं,बल्कि पृथ्वी सूर्य के चारो ओर घुमती है” उनके शोध के विषय में पुस्तक प्रकाशित होते ही समस्त संसार में भारी उत्पात मच गया……..और उनका सबसे बड़ा दुश्मन,पोप और इसाई मिशनरीज़ बन गयी,सास्त संसार कि इसाईयत उनका विरध करने लगी…….क्यों गैलिलियो का ये सिद्दांत सम्पूर्ण इसाई धर्म कि नीव हिलाने के लिए काफी था,क्योंकि इसाई धर्म के अनुसार “पृथ्वी ब्रहम्मांड का केंद्र है,और सूर्य इसके चारो ओर चक्कर काटता है,साथ ही पृथ्वी स्थिर है” जबकि गैलिलियो का विचार ठीक इसका उल्टा था,जिससे इसाई धर्म के मूल्य सिद्धांतों और धार्मिक पुस्तक बायविल कि विश्वसनीयता और सत्यनिष्ठ प्रभावित हो रही थी,सो विरोध तो होना ही था. सम्पूर्ण विश्व में गैलिलियो कि पुस्तक कि पांडुलिपियाँ जलाई गयी,उग्र आन्दोलन के द्वारा भी विरोध किया गया,पोप ने गैलिलियो पर पुस्तक प्रकाशित करने पर रोक,प्रकाशित पांडुलिपियाँ वापस लेने,अपने सिद्धांत से मुकरने और सार्वजनिक माफ़ी मांगने का दवाव डाला गया.पर गैलिलियो आने सिद्धांत पर डटा रहा,तब विरोध और उग्र हुआ,पोप के कहने पर,अदालत में मुकदमा प्रारम्भ हुआ,गैलिलियो को अपार यातनाएं दी गयीं…….पर एक बूढ़ा विचारक कब तक अडिग रहता,आखिर नौवत फांसी लगने कि आने लगी……..तब गैलिलियो जब अदालत में हाज़िर किया गया,तो उस बूढ़े विचारक ने बड़े पते कि बात कही……..बिलकुल बास्तविक,परन्तु अकाट्य सत्य….

आदार्णीय जूरी के सदस्यों……

मै गैलिलियो गैलिली,आप लोगों के अनुसार,अपने शोध एवं सिद्धांत वापस लेता हूँ,और आपके अनुसार घोषणा करता हूँ,कि मेरे सिद्धांत और विचार सत्य नहीं थे,मै तो पागल था…..जो इतने दिनों बेकार ही यातना सहता रहा,बेकार बकबास झक मारता रहा,मै अपने विचार वापस लेता हूँ,और ये भी घोषणा करता हूँ,कि पृथ्वी के चारो ओर सूर्य घूमता है,और पृथ्वी स्थिर है,जैसा कि बायबिल में लिखा है…….मेरे विचार बकबास,और एक बूढ़े आदमी के सड़े दिमाग कि उपज मात्र थे…….कृपया मेरी भूल के लिए मुझे माफ़ करें…………………………………………….. …………………………………………………..

.पर एक बात फिर भी कहता हूँ,कि जैसे आपके कहने पर मैंने मान लिया,कि सूर्य ही पृथ्वी के चारो ओर घूमता है,मेरा सिद्धांत गलत था……………………………………….मगर सूर्य नहीं मानेगा आपका कहा,वो नहीं घूमेगा पृथ्वी के चारो ओर…..और न पृथ्वी आपके कहने से स्थिर नहीं हो जायेगी……जैसा कि आपके भय से मैंने कह दिया………पर न सूरज आपका कहना सुनेगा ……नहीं पृथ्वी आपकी बात मानेगी मानेगी……..क्योंकि आप उन्हें न तो दंड दे सकते है…….न फांसी पर लटका सकते है…….न वे आपसे भयभीत हैं…….नहीं कभी आप उनको डरा धमका सकते…………….सो घूमेगी पृथ्वी ही सूर्य के चारो ओर………आप चांहे जो करले………..पर आपके कहने से,मै अपनी बात बापस लेता हूँ…….क्योंकि मेरे कहने से भी…..वे अपना परिभ्रमण बंद नहीं करसकते……वे तो घूमते रहेंगे….पर मै मान लेता हूँ,जैसा आप कहते हैं,बायविल कहती है….वोही सत्य है…..मेरे आपके कहने से कोई अंतर नहीं पड़ने वाला….. तब पोप ने,अदालत ने,और राजा-प्रजा ने सोचा,विचार किया…..चलो गैलिलियो स्वम तो स्वीकार कर रहा,वो गलत था,बायविल सही है……इतना ही काफी है,कुछ तो लाज बच रही है……….वर्ना तो उन्हें लगता था,कि गैलिलियो अपनी सत्यता के लिए जान देदेगा,पर सिद्धांत को अमर कर जायेगा,सो इतना ही काफी है……………………भले ही पृथ्वी सूर्य के चारो ओर घुमती लाज वरहे…….बता कौन किसे रहा है….कुछ तो ची.


पर कहते हैं,सत्य सदैव जिंदा रहता है,आज गैलिलियो का सिद्धांत प्रमाणिक हो चूका है……..और जो पोप और चर्च गैलिलियो के सिद्धांत और विचारों का विरोध कर रहे थे…….आज सैकड़ों सालों के बाद,उसी चर्च में वर्ष २००८ में गैलिलियो कि मूर्ति स्थापित कि गयी है,और उसी चर्च ने गैलिलियो के सिद्धांत को मान्यता दी है………………


और वर्तमान पोप में,पूर्व में गैलिलियो के साथ किये गए अमानुषिक अत्याचार के लिए सार्वजनिक माफ़ी भी मांगी है…….जैसा गैलिलियो ने कहा था….आज भी सूर्य के चारो ओर पृथ्वी ही घूम रही है,………..कितने पोप आये और चले गए…..कितने सत्ताधारी विश्व विजेता आये और चले गए….पर कोई भी शक्ति सूर्य को पृथ्वी के चारो ओर नहीं घुमा पायी…….अकेले गैलिलियो के आगे,समस्त इसाईयत,समस्त शक्ति हार गयी……पर आज भी पृथ्वी ही घूम रही है सूर्य के चारो ओर,और सदियों शताब्दियों तक घुमती रहेगी…….और रहेगा गैलिलियो का सिद्धांत………ये है सत्य…. शेष आगामी अंक में …………...


कुछ ऐसी ही सत्यता को आपके सम्मुख रखना का हम प्रयास कर रहे हैं,कुछ नया,कुछ अनोखा नहीं,बल्कि आपके मन कि बात कि,आपके विचारों को अक्षरों का रूप देने का एक लघु प्रयास है……….नारी का मर्म…………… भगवान् का सबसे बड़ा भेद-भाव तो ये है,कि मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग मस्तिष्क की धारिता……..भगबान ने नर अर्थात परुष के मस्तिष्क का औसत आकार और भार में अंतर…….

जन्म के समय एक बालक का मस्तिष्क बालिका के मस्तिष्क से औसतन १२-२०% अधिक होता है,

प्रौड़ परुष के मस्तिष्क का भार,प्रौड़ महिला के मस्तिष्क के अकार से औसतन ११-१२% अधिक होता है.

पुरुष के मस्तिष्क का भार औसतन १,३२५ ग्राम और महिला के मस्तिष्क का औसत भार १,१४४ ग्राम होता है (१८६१ ई. पॉल ब्रोका )

महिला के मस्तिष्क के श्वेत पदार्थ में तंतुओं की लम्बाई १४६,००० कि.मी. और पुरुष में १७६,३०० कि.मी. होती है,

और पुरुष के मस्तिष्क का “सेरेब्रल कोर्टेक्स” भाग, महिला से ३३% अधिक होता है .

वर्ष १९९२ में ६,३२५ सैनिकों पर अध्ययन से परिणाम प्रात हुआ,कि पुरुष के मस्तिष्क का औसत आयतन/धारिता १४४२ सी.सी (क्यूबिक सेंटीमीटर) और महिला के मस्तिष्क कि औसत धारिता १३३२ सी.सी. (क्यूबिक सेंटीमीटर)

और पुरुष के मस्तिष्क में ग्रे मैटर,महिलाओं से औसतन छै: गुना अधिक होता है,जोकि प्रत्यक्ष रूप से जनरल इंटैलीजैंस से संवंधित होता है.

नर मनुष्य की याददाश्त (मेमोरी साइज़ ) मादा मनुष्य से २% अधिक होती है

.नर के मस्तिष्क का हैपोथैलेमस भाग का आकार नारी के इसी भाग से २.२ गुना (दो गुने से अधिक) होता है.

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Thomson के द्वारा
February 2, 2014

Good points all around. Truly apceepiatrd.

chaatak के द्वारा
October 18, 2010

स्नेही मालिक जी अब मैं समझा कि पुरुषों की बुद्धि महिलाओं सी तीव्र क्यों नहीं होती बेचारे की खोपड़ी ही इतनी बड़ी होती है कि इन्फार्मेशन ढूँढने में वक्त लग जाता है| शायद यही कारण है कि पुरुष की बुद्धि जब तक टियूब लाईट की तरह जुग्जुगा के लोड ले तब तक महिलाओं की सी० ऍफ़० एल० खटाक से जल जाती है| मेरा इशारा तो समझ गए होंगे ना आप| देर से टिप्पड़ी के लिए माफ़ी चाहता हूँ| अच्छी जानकारी से भरी पोस्ट पर बधाई!

ashvini kumar के द्वारा
October 15, 2010

सेमा मलिक जी हर जगह गणितीय आंकड़े फिट नही होते ,,आपने नवीन एवं रोचक जानकारी से अवगत कराया इसके लिए आपका धन्यवाद |

sdvajpayee के द्वारा
October 15, 2010

तमाम जानकारियों और विचारणीय बातों से भरा आलेख। इस्‍लाम और पैगम्‍बर माहम्‍मद की  वैदिक विचारधारा से नजदीकी इंशा अल्‍लाह आज शाम तक लेख पोस्‍ट करूंगा। सम्‍मति दे सके तो बेहतर।

RaJ के द्वारा
October 14, 2010

मस्तिष्क के विभिन्न नाप तोल भी अभी तक यह सिद्ध करने में अक्षम हैं कि महिलाएं किसी भी आई क्यू टेस्ट में पुरुषों कम बैठती है यानि आकर से बुधि का निर्धारण नहीं होता बाकि गलीलियो के बारे जानकारी रोचक थी

rajkamal के द्वारा
October 14, 2010

खुदा ने इस प्रकृति का संतुलन और स्थिरता बनाए रखने के लिए ही यह व्यवस्था की है ….. कयोंकि अगर सभी औरते खासकर सुंदर ज्यादा या बराबर अक्ल वाली होती तो यकीनन ज्यादातर मर्द कुंवारे ही रहते …और शादिया कौन सी टिकाऊ होती …

rajkamal के द्वारा
October 14, 2010

सेमा जी … अगर खुदा यह उचित भेदभाव नहीं करता तो अधिकाँश पुरुष कुंवारे ही रहते ….और शादिया भी ज्यादा देर तक कहाँ टिकती … इस दुनिया की स्थिरता और संतुलन के लिए औरतो का कमअक्ल होना … खास कर सुंदर औरतो का होना तो सभी मर्दों पे उस खुदा की बहुत ही बड़ी नेमत है …

rajkamal के द्वारा
October 14, 2010

सेमा जी …. अगर यह उचित भेदभाव ना होता तो इस दुनिया में अधिकाँश पुरुष कुंवारे ही रहते …. और शादीआ भी ज्यादा देर कहाँ टिकती …. तो इस दुनिया के संतुलन और सिथरता के लिए औरतो का…. खासकर सुंदर औरतो का कमअक्ल होना उस खुदा की सारे मर्दों पे बहुत बड़ी रहमत है ….

jalal के द्वारा
October 14, 2010

शायद इस में कमेन्ट नहीं कर पा रहा हूँ.

jalal के द्वारा
October 14, 2010

जानकारी तो बड़ी दिलचस्प मालूम होती है.हाँ कम बेशी तो है. लेकिन यह तो शारीरिक है. मानसिक रूप से भी अंतर होता है. मतलब सोचने की शक्ति और तरीका. जी इसी जोड़ बेजोड़ से तो दुनिया अच्छी तरह से चल रही है. सभी बराबर होंगे तो एक दुसरे की ज़रूरत नहीं रहेगी. सिस्टम को आसान करने के लिए अलग बना दिए गए हैं. नहीं तो एक से भी काम चल जाता है, ऐसे कितने ही प्राणी थे और शायद हैं भी. एक कोशिकीय जीवों में अभी भी ऐसा ही है. खैर आख़िरकार आपने अपनी खूबसूरत आँख दिखा ही दिया. पहले तो नाम के अलावा कुछ नहीं आता था. खैर जो भी हो ठीक है. जानकारी अच्छी दी है आपने. warm regards


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