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पुर्न: जन्म घटना मुस्लिम समाज में क्यों नहीं घटती ?

Posted On: 15 Mar, 2012 Others में

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पुर्न: जन्म मानव के लिए सदैव “अदभुद,अलौकिक,और विस्मयजनक” एक अनसुलझी पहेली रहा है.जिसका किसी धर्म विशेष से कोई लेना देना नहीं रहा है,न विज्ञान कभी इसकी पुष्टि कर पाया है.

ये सत्य है,कि इस नश्वर संसार में कुछ भी स्थिर नहीं है,और विनाश एवं निर्माण कि चरण वद्ध क्रिया सदैव चलती है,जन्म और मृत्यु का अनवरत क्रम चलता रहता है. पर क्या एक जीव कि मृत्यु उपरान्त उसका फिर से जन्म हो सकता है,क्या नष्ट हुआ अनु पुन पूर्व अवस्था में संयोजित हो सकता है ?

पुर्न: जन्म जैसी कोई घटना विश्व के किसी भी देश में “मुस्लिम समुदाय” में नहीं घटी है,या यूँ कहें,कि ऐसी घटना मुस्लिम समाज में आज तक घटने का कोई उल्लेख नहीं मिलता,न ही मुस्लिम धर्म के साहित्य अथवा पवित्र कुरआन में, और नाही मुस्लिम समाज से जुडी अन्य सन्दर्भों,साहित्यों,स्रोतों में दर्ज हैं.

पुर्न: जन्म की सबसे अधिक घटनाएं “भारतीय हिन्दू धर्म के अनुयायी समाज” में घटती देखी गयी हैं,और हिन्दू धर्म विश्व का एक मात्र धर्म है,जिसका दर्शन पुर्न रूप से “पुर्न: जन्म” पर आधारित है. पर ये भी ध्यान देने योग्य तथ्य है कि पुर्न: जन्म जैसी घटनाएं अधिकांशत: “विकासशील अर्थव्यवस्था वाले तीसरी दुनिया के पिछड़े देशों” में और विशेष रूप से अति पिछड़े गरीब और अशिक्षित परिवारों” में किसी के पुर्न: जन्म की घटनाएं दिखाई देती हैं.

पुर्न: जन्म का दावा करने वाले बालक या बालिका अपनी १० वर्ष की आयु पूरी करते-करते अपनी पूर्व जन्म सम्बन्धी घटनाएं और ज्ञान भूलने लगते हैं,और अगले दो-चार वर्षों में वे “अपने पूर्व जन्म सम्बन्धी सभी जानकारियाँ” पूरी तरीके से भूल जाते हैं.

पर ये कहना अधिक सारगर्भित और उपयुक्त लगता है,कि……प्रत्येक असत्य कहीं-न कहीं सत्य के खंडहर पर खड़ा होता है,और प्रत्येक झूठ में कहीं न कहीं सत्य का समावेश होता है,इसी प्रकार पौराणिक किदवंतियाँ कथाएं और मिथक कहीं न कहीं सत्य के आधार पर उपजे,और अपने में सारगर्भित गूण रहस्य और ज्ञान की कुंजी छिपाए हुए हैं. अब तक के अनुभव,अनुसन्धान से इतना अवश्य कहा जा सकता है,कि हाँ “पुर्न: जन्म” एक भौतिक सत्य से परिपूर्ण अलौकिक घटना है,जो यदा-कदा अलग-अलग स्थानों पर,भिन्न-भिन्न समाज और समुदाय,जातियों और धर्मों में यदा-कदा घटती रहती है,और लोगों में इहलोक और अलौकिक शक्तियों के साथ-साथ एक स्रष्टा (भगबान) की उपस्थिति के विश्वास को दृण,और आस्था बढाती है.

क्रमश:

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Dr Skand S Gupt के द्वारा
June 3, 2012

आंखें वही देख या खोज सकती हैं जिसे दिमाग जानता है.  जो आप देखना नहीं चाहते वो आप कैसे देख सकतेहैं खासकर गूढ़ तथ्य. हिंदू धर्म के अलावा बाकि धर्म और समाजों की उमर बहुत छोटी है.. पर सत्य चाहने वाला चाहे तो..

malik saima के द्वारा
March 19, 2012

dhanyvaad aap sabhi logon ko,punarjanm par pritikriya ke liye,aasha karte hain ki bhavishy men aisa hi sahyog aur saanidhy milta rahega

dineshaastik के द्वारा
March 17, 2012

आदरणीय मलिक साहब,  ईश्वर(खुदा), धर्म(मजहब), भूत-प्रेत, पुनर्जन्म आदि मानवीय कल्पनायें हैं। इन सबका अविष्कार विद्वान मनुष्य ने अन्य अशिक्षित व्यक्तियों को डराकर शोषण करने के लिये किया था। इन सभी बातों का जन्म अज्ञानता एवं डर से हुआ है। प्रकृति के अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है तथा एक मात्र धर्म मानवधर्म है। अन्य सभी सम्प्रदाय हैं। हिन्दु एक संस्कृति है, धर्म नहीं। भारत का प्रचीन धर्म सनातन है, जिसे लोग हिन्दु धर्म समझते हैं। हर भारतीय हिन्दु है। 

dineshaastik के द्वारा
March 17, 2012

आदरणीय मलिक जी नमस्कार, ईश्वर(खुदा, गोड आदि),आत्मा, भूत आदि कुछ नहीं होता है। यह सब दिमागी लोचा है। इन  सब का जन्म हमारी अज्ञानता एवं डर के कारण हुआ है। हम केवल मनुष्य है। और हमें मनुष्य बनकर ही रहना चाहिये। हिन्दु या मुसलमान बनकर नहीं। धर्म हमें बाँटता है। और हमारा ईश्वर आनन्द लेता है। संसार में ईश्वरीय धर्म केवल एक है मानवता। एवं ईश्वर भी एक है प्रकृति। इसके अतिरिक्त सब मानव की कल्पनायें हैं। इस संबंध में मेरी रचना धर्म और शराब पढ़िये।

chandanrai के द्वारा
March 16, 2012

आदरणीय आपने हर महत्वपूर्ण बिंदु को छुआ है और उसका आंकलन किया है ! बहुत सटीक विश्लेषण और बिलकुल ठीक विचार ! बहुत बेहतर Pls. comment on http://chandanrai.jagranjunction.com/Berojgar

chandanrai के द्वारा
March 16, 2012

आदरणीय , आपने हर महत्वपूर्ण बिंदु को छुआ है और उसका आंकलन किया है ! बहुत सटीक विश्लेषण और बिलकुल ठीक विचार ! बहुत बेहतर Pls. comment on http://chandanrai.jagranjunction.com/Berojgar

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 16, 2012

मालिक जी नमस्कार, आत्मा उर्जा का स्वरुप है.उर्जा कभी नष्ट नहीं होती, यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है..इसी आधार पर पुनर्जन्म की परिकल्पना की गयी है. यह पूरी श्रृष्टि के लिए परिकल्पना है. इसका किसी धर्म या जाती से कोई लेना-देना नहीं है.

March 15, 2012

अर्थपूर्ण और विचारणीय आलेख……..हार्दिक आभार.


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