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किसी दुकानदार ने कफ़न का कपडा नहीं दिया था,सर शादी लाल के अंतिम संस्कार के लिए.

Posted On: 28 May, 2012 Others में

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अमर शहीद क्रांतिकारी भगत सिंह को फांसी की सजा दिलाने वाले शादी लाल को अंग्रेजों ने पुरस्कृत करते हुए,सर की उपाधि दी और बहुत बड़ी धनराशी और ज़मीन भी,उनकी गद्दारी को बफादारी मानते हुए दी,आज सर शादी लाल एक शुगर मिल शामली उत्तर प्रदेश सहित अन्य कई उद्योगों के मालिक हैं,और स्वतंत्र भारत में एक सम्मानित समाजसेवी के रूप में जाने जाते है. भगत सिंह के विरुद्ध दुसरे प्रमुख सरकारी गवाह “मशहूर लेखक खुशवंत सिंह के पिता” थे,उन्हें भी गद्दारी के एवाज़ में अंग्रेजों नें ज़मीन और जायजाद दी,और आज वे भी एक सम्मानित समाज सेवी के रूप में याद किये जाते हैं. देशवासी तो भले ही अपने अमर शहीदों की कुर्वानी को भुलाकर,गद्दारों को समाजसेवी के रूप में देखते हैं,पर जब सर शादी लाल की मृत्यु हुई थी,तब उनके कस्वे के किसी भी दुकानदार ने “गद्दार के लिए कफ़न का कपडा” नहीं दिया था,शादी लाल के लड़कों का कफ़न का कपडा दिल्ली से लाकर अपने पिता का अंतिम संस्कार करना पड़ा था.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपद मुज़फ्फर नगर के सर छोटू राम डिग्री ( पी.जी.) कालेज से बी.एस.सी.(कृषि) की पढाई के दौरान,हम लोग “कंपनी बाग़” के समीप “नुमाइश कम्पाउंड” में हर वर्ष लगने वाली “प्रदर्शनी” का पूर्ण आनंद लेते थे.इस प्रदर्शनी के कार्यक्रमों के प्रमुख प्रायोजक “सर शादी लाल शुगर मिल लि.” होती थी.जिसका गुणगान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान आयोजकों द्वारा बड़े गर्व और सम्मान से किया जाता था.

वर्ष १९९३ की गर्मियों में इस “प्रदर्शनी” में एक सज्जन से भेंट हुई,जो संभवता काफी अच्छी जानकारी रखते थे.सर्वप्रथम उन्ही से ये पता लगा कि “ये वो ही सर शादी लाल हैं,जो अमर शहीद क्रांतिकारी भगत सिंह को फांसी लगवाने के लिए पूर्णतया जिम्मेद्दार है”

सचमुच उस बात से मुझे गंभीर आघात भी पहुंचा,और सहज विशवास भी नहीं हुआ,कि स्वतंत्र भारत के लोग अपने अमर शहीदों कि कुर्वानियों को इतनी आसानी से भुला देंगे,और क्रांतिकारियों के विरुद्ध गद्दारी,और उन्हें फांसी के तख्ते तक पहुंचाने वाले धूर्त और लोभी लोगों का महिमामंडन सार्वजनिक रूप से करते हुए,स्वं को धन्य समझेंगे.

उस दिन के बाद मै और मेरे कुछ मित्र “ऐसे किसी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे,जिसके प्रायोजक सर शादी लाल शुगर मिल लि. हो”. पर हम चार पांच लोगों के कार्यक्रम में न पहुँचने किसी को न तो परेशानी हुई,न अफ़सोस. प्रदर्शनी आज भी लगती है,कार्यक्रम भी होते हैं,प्रायोजक भी सर शादी लाल होते हैं,और हम जैसे लोग आज भी “सर शादी लाल का महिमामंडन कर खुद को गौरवान्वित अनुभव करते हैं.

क्या येही श्रद्धांजलि है,अमर शहीद क्रांतिकारियों के लहू कि,उनकी कुर्वानियों की……स्वतंत्र भारत में इससे निर्लज्ज

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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Alberto के द्वारा
February 2, 2014

Kick the tires and light the fires, problem ofiaicflly solved!

yogi sarswat के द्वारा
May 31, 2012

ये अक्सर होता है सायमा जी , चाटुकारों और गद्दारों को हमेशा नवाज़ा जाता है और सच्चे वीरों को भुला दिया जाता है ! सिंधिया परिवार को ही देखिये ? खुशवंत सिंह की इंदिरा गाँधी की चाटुकारिता ने उन्हें कहाँ से कहाँ पहुंचा दिया ! मेरे लिए एक दम नयी जानकारी ! बहुत ही बेहतरीन लेख !

yogi sarswat के द्वारा
May 31, 2012

मेरे लिए एकदम नयी जानकारी ! बहुत ही जानकारी भरा लेख ! साइमा जी , हमेशा यही देखा गया है की सच्चे और हकदार लोगों की जगह चाटुकारों को सम्मान मिला है , प्रोन्नति मिली है , वाह वाही मिली है ! खुशवंत सिंह भी कम चाटुकार नहीं हैं और इंदिरा गाँधी की चाटुकारिता करते करते वो कहाँ से कहाँ पहुँच गए ? याद आता है , सिंधिया परिवार – अब जय जय कार होती है इन गद्दारों की ! बहुत ही बेहतरीन लेख !

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 29, 2012

मुझको किसी ब्लागर सज्जन ने एक लिंक दिया था …..वहां पर यह सारी जानकारी थी ….. अगर ऐसा है तो कहीं आपक यह लेख भी चोरी का तो नहीं है ?……. जय श्री कृष्ण!!! :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 29, 2012

मुझको किसी ब्लागर सज्जन ने एक लिंक दिया था …..वहां पर यह सारी जानकारी थी ….. अगर ऐसा है तो कहीं आपक यह लेख भी चोरी का तो नहीं है ?……. जय श्री कृष्ण जी :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

Mohinder Kumar के द्वारा
May 29, 2012

साईमा मलिक जी, यह जानकारी मुझे नहीं थी.. आपका लेख पढ कर कुछ नया जाना. आभार.

s.p. singh के द्वारा
May 29, 2012

मैडम साइमा जी आदरणीय दिनेश आस्तिक जी  , आपका लेख एवं टिप्पणी एक सुन्दर प्रयास है परन्तु गाथा तो इतनी बड़ी है की गद्दारों, चाटुकारों.एवं देशद्रोहियों पर किताबों पर किताबें भरी पड़ी, परन्तु आपने अपनी सुविधानुसार दो चार नाम लिख कर बाकी पर पर्दा डालने का कार्य किया है इससे समाज का कोई भला नहीं होने वाला क्योंकि अगर भावी पीढ़ी को या वर्तमान समाज को कुछ बताना ही है तो वह अपनी सुविधानुसार या एक ही दिशा या एक परिवार के विषय मैं कहना इतिहास के साथ बलात्कार करना जैसा ही है, यहाँ तो अमर शहीद क्रांतिकारी भगत सिंह को फांसी की सजा दिलाने वाले शादी लाल को अंग्रेजों ने पुरस्कृत करते हुए,सर की उपाधि दी अकेले नहीं है इस देश के एक पूर्व प्रधान मंत्री ने भी सरकारी गवाह बन कर अपनी जान ही नहीं बचाई क्रांतिकारियों का भेद भी अंग्रेजों को बताया था लेकिन भाग्य के धनी होने के कारण सात वर्ष तक प्रधान मंत्री पद के वैभव का सुख भी भोग था —धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
May 29, 2012

यह तो कुछ  नहीं है मैडम  नेहरु जी ने उत्तर  प्रदेश  पुलिस  की कमान उस  व्यक्ति के हाथ  में दी थी जिसने चन्द्रशेखर को इलाहाबाद  के पार्क  में घेरा था जबकि चन्द्रशेखर  को नेहरु जी ने ही चन्दा देने के बहाने इलाहाबाद   बुलाया था। यह बात  केवल  नेहरू जी को मालूम  थी। जब वह देश  के प्रधान मंत्री बन सकते हैं तो फिर शादी लाल  या खुशवंत  सिंह के पिता को सम्मान क्यों नहीं। 1857 में सिंधिया का अंग्रेंजो का साथ  देने का परिणाम  ही है कि आज  उनके परिवार के सदस्य दोंनो ही प्रमुख  राष्ट्रीय दलों में अपना प्रभाव जमाये हुये हैं। इस  तरह की कहानियाँ तो भरी पड़ी हैं।

May 29, 2012

आज के देश भक्तों की देश भक्ति पर चोट करता हुआ आलेख……..हार्दिक आभार…………………..!

anoop pandey के द्वारा
May 28, 2012

मालिक जी अच्छा याद दिलाया………..पर एक ही नाम पर रुक गए बाकि दो का भी चिटठा खोल देते तो सोने पर सुहागा था………..भारत की एहसान फरामोश जनता की कुछ कलई तो खुलती. धन्यवाद तथा आभार.


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