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कुरआन में हिन्दू,शव्द कहीं नहीं है

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इस्लाम के अभ्युदय से पूर्व अराब में “मनात” नाम की देवी की पूजा की जाती थी,और काबा में मनात की मूर्ति स्थापित थी.

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संसार के प्रत्येक धर्म ग्रन्थ में विधर्मियों को पापी /गलत माना गया है,और “राक्षस” दैत्य,असुर,पापी,विधर्मी,दुष्ट आत्मा,आदि

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विश्लेषण से संदर्भित किया गया है.और उन्हें नरक का भागी बताया गया है.और समस्त धर्म ग्रन्थ इसी सन्दर्भ के
चहुमुखी घटनाओं से भरे पड़े हैं.
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सम्पूर्ण कुरान में हिन्दू,अथवा हिन्दुस्तान शव्द का कहीं प्रयोग नहीं किया गया है,और नाही कोई ऐसा उद्धरण प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से हिन्दू धर्म के विषयक कुरान में अंकित है,फिर भी जाने क्यों लोग कुरान के विषयगत हिन्दू धर्म से जुडी कपोल कल्पित धारणाएं/कथन प्रतुत कर कुरान के विरुद्ध दुश प्रचार करते रहते हैं,संभवता स्वाम को चर्चित करने के उद्देश एवं कुछ निजी व्यक्तिगत कारणों से.

कुरआन में हिन्दू,शव्द कहीं नहीं है,न ही हिन्दुस्तान शव्द का प्रयोग किया गया है.
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मयंक जी के लेख-”क्या कहता है कुरआन हिन्दुओं के बारे में-(लव -जेहाद) भाग १ व् २ एवं ३”भी कुछ इस परम्परा का निर्वहन मात्र प्रतीत होता है. विद्वान् लेखक श्री मयंक जी द्वारा कुरान की आयत सुरितुन्निसा का उद्धरण देते हुए बताने का प्रयास किया है कि ये आयत हिन्दुओं के विषय में है,क्योंकि संसार में अन्यंत्र नारी को नहीं पूजा जाता है.ये कथन सत्य व् प्रमाणिक नहीं है,क्योंकि-
१- इस आयत या अन्य स्थान पर कहीं भी कुरआन में हिन्दू अथवा हिंदुस्तान शव्द प्रयोग नहीं किया गया है.
२- ये एक तथ्यहीन कथन है कि भारत के अतिरिक्त कहीं अन्यंत्र नारी पूजा नहीं होती,जबकि-

### इस्लाम के पार्दुभाव से पूर्व अरब में मनात नाम की देवी की पूजा की जाती थी,जिसका बुत पवित्र काबा में हबल,लात,उज्जा और अन्य भाग्बनों की मूर्तियों के साथ रखा गया था,और पूजा जाता था.

इस्लाम के अभ्युदय के समय सम्पूर्ण विश्व में सैकड़ों नाम की अलग अलग देवियों की पूजा की जाती थी.
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जबकि स्रष्टि के प्रारंभ से आज तक विश्व के प्रत्येक देश और जातियों में नारी सदैव किसी न किसी रूप में पूजनीय रही है,चाहें वो ईसाई धर्म सैंट मेरी (मुस्लिम के अनुसार बीबी मरियम) या यूरोप कि देवी वीनस हो,और इस्लाम धर्म के पर्दुभाव के समय ग्रीक और रोमन देवियों के नाम जिन्हें तात्कालिक रूप से एवं वर्तमान में पूजा जाता है,का विवरण प्रस्तुत है-

(अ) एल्सिओं – समुन्द्र कि देवी
(आ) अलेक्ट्रोना- सूर्य कि देवी
(इ) अलेथिया-सत्य कि देवी
(ई)अम्फिसितोनिस- शराब कि देवी
(ए) अनैतिस- प्रक्रति कि शक्ति कि देवी (कुछ एशियन क्षेत्र में भी पूज्य)
(उ) अफ्रोदैत- प्रेम और सुन्दरता कि देवी
(ऊ) ऐरे-श्राप कि देवी
(ओ)आर्टेमिस-शिकार कि देवी
(क)अष्ट्रीय-न्याय कि देवी
(ख)अथना- रोम कि मात्र देवी,जो जिउस कि पुत्री थी,ग्रीस कि भी पूज्य देवी
(ग) चरिट्स- सुन्दरता कि त्रिमूर्ति-ग्रीस
(घ)सैबल-ग्रीस,रोम(मूलतया ग्रीक देवी) प्रजन और शक्ति कि देवी
(च) देम्तर- उर्वरता,अथवा भूमि कि देवी
(छ) एलाफ्थिया- बच्चे के जन्म कि देवी
(ज) एलिओस-अथेन्स कि देवी
(झ) एरीस-युध्य कि देवी

इसके अतिरिक्त हजारों अन्य नारियां जो विभिन्न्य देशों में पूजी जाती थी और पूजी जाती हैं कि सूचि स्थानाभाव के कारन यहाँ दिया जाना संभव नहीं है,परन्तु इतने से ही स्पष्ट है कि इस्लाम के अभ्युदैय के समय तात्कालिक रूप से विश्व के बहुत से देशों में नारी कि पूजा कि जाती थी,न कि केवल भारत में,अता इस अधर पे आयत सुरितुन्निसा में संदर्भित मूर्ति पूजकों का सम्बन्ध हिन्दुओं से कदापि नहीं लगाया जा सकता है.

इस्लाम के अभ्युदय और कुरान कि रचना के समय अरब में सेकड़ों भगवानों/देवों कि पूजा कि जाती थी,और १०० के करीब भगवानों कि मूर्तियाँ काबा में स्थापित थीं,जिनमें से कुछ मुख्य के नाम प्रस्तुत हैं-

काबा के बुत (इस्लाम से पूर्व)
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(अ) हूबल- प्रजनन का देवता,सबसे बड़ा भगबान माना जाता था,और काबा में रखा सबसे बार बुत (मूर्ति) था,जो सात तीर

धारण किये था.

(आ) लात-

(इ) उज्जा-

(ई) मनात – मनात को भगबान कि बेटी के रूप में अरब में इस्लाम से पूर्व पूजा जाता था.जिसका बुत काबा में रखा था.
(उ) अम्म -
(ऊ) मुकाह-
(ओ) शिन-
(औ) वदद-

इस्लाम का अरब में वर्चस्व हनी के वाद ये बुत काबा से हटा दिए गए,अथवा नष्ट कर दिए गए,क्यों की इस्लाम में मूर्ति पूजा निषेध कर दी गयी.

इस्लाम के उद्भव से पूर्व अरब में अधिकतर लोग नवजात बलिकयों को जिंदा दफ़न कर देते थे.
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कुरआन में वर्णित काफिर शब्द का अर्थ स्पष्टीकरण-
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कुरआन में विधर्मी (दुसरे धर्मों के लोगों,इस्लाम न मानने वाले अरबों,और नास्तिकों के लिए) शब्द प्रयोग किया गया है,मुख्त्य: ये शब्द उन अरबों के प्रयोग में लाया गया है,जो अरब में मूर्ति पूजा करते थे और इस्लाम का विरोध करने वालों के लिए प्रयोग किया गया है.
दूसरा शव्द कुरआन में “मुनाफिक” उन लोगों के लिए दिया गया है जो दिखावे के लिए तो इस्लाम कबूल कर चुके थे परन्तु अंदरूनी रूप से इस्लाम के प्रति बुरी भाब्ना रखते थे,और ऐसे छल प्रपंच रचने का प्रयास करते थे ,जिससे इस्लाम और मुसलामानों को नुक्सान पहुंचे,कुरान में ऐसे लोगों गलत बताया गया है.

कुरआन में किसी धर्म विशेष को गलत नहीं बताया गया है.
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मई समस्त पाठक बंधुओं से क्षमायाची हूँ,यदि कारन अकारण अथवा भूल/त्रुटी वश इस ब्लॉग के किसी शब्द अथवा कथन से किसी की धार्मिक अथवा व्यक्तिगत भावनाओं को कोई अघात अथवा क्षति पहुंची हो,या लेख में प्रस्तुत उध्य्रण संवंधित ग्रन्थ के मूल से भिन्न हो,तो धर्मग्रन्थ के मूल भाष्य को सही माना जय,एवं लेख के प्रस्तुत उध्य्रण को निरसित माना जय.धन्यबाद



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27 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

body build के द्वारा
October 19, 2013

यह मैं ausafmalik01.jagranjunction.com के लिए एक संदर्भ पोस्ट अगर मेरे छोटे व्यक्तिगत वेबलॉग में इस बारे में बात डाल देंगे कि ठीक हो सकता है?

primo steroid के द्वारा
October 19, 2013

यह मैं ausafmalik01.jagranjunction.com के लिए एक संदर्भ पोस्ट अगर मेरे छोटे व्यक्तिगत वेबलॉग में इस बारे में बात डाल देंगे कि ठीक हो सकता है?

venus के द्वारा
March 2, 2013

2nd thing HINDUs as we are called now are not IDOL WORSHIPPER< THEY WORSHIP IDEA BEHIND IDOL AS I WORSHIP LORD SHIVA WHY JUST VISULISE SHIV IDOL ITS HEAD BEARS MOON, GANGA AND FOREHEAD HAS CHANDAN TILAK IT TELLS ONE ALWAYS KEEP YOUR COOL 2 THERE IS A SNAKE ARROND NECK AND POISON IN THROT[ NEELKANTH] MEANS TRY TO MAKE FRIEND WITH ENEMY ALSO AND BRING OUT THE POISON OF HATERED BUT DO NOT DRINK OR YOU WILL ALSO BE POISONESS 3 LORD SHIVA HAS NANADI AS HIS VAHAN CARRIOR, HE WEARS BAGHCHARMA OR SKIN OF TIGAR AND HIS ONE NAME IS PASHUPATINATAH WE ALL HAVE AN ANIMAL IN US SO EITHER ENSLAVE IT AND MAKE NANDI OR KILL IT AND MAKE BAGHAMABR [ JUST TO REMEMBER THAT ANIMAL INSTINCT CANRAISE ITS HEAD AT ANY TIME] PASHUPATINATH BECOME LORD OF YOUR ANIMAL INSTINCT AND NOT VICE VERSA] 4 SHIVA HAS TRISHOOL {trident} IN HIS HAND WHICH SYMBOLISES THREE PAINS DUKHAS DAHIK [ BODILY AILMENTS], BHAUTIK [ EARTHLY OR MONEY WISE] AND DAIVIK [ UNSEEN OR NATURE GIVEN] SO THESE WILL COME TO EVERY BODY ,BUT THERE IS A DAMROO TIED TO TRISHULA AND LORD IS KNOWN AS NATRAJA [ KING OF MERRYMAKERS WHO DANCE AND ENJOY] SO EVEN IF YOU GET ALL THEE TYPE OF GREIF KEEP SANE AND ENJOY LIFE. I HAVE TAKEN THIS piece FROM THE BLOG OF ONE SHYAM SKHA SHYAM

venus के द्वारा
March 2, 2013

Dear sir YOU should thorough research history before writing any article. Leave aside Quran HINDU word can not be seen in vedas, upnishadas,puranas,samhitas, mahabharat, ramayana or even in contemprary bodhist or jain relegious books. Hindu word came in to existence when muslim invaded sindh you may know that there is no alphabet akin to S in sindhi language,if you want to say sunder sham a sindhi will say hunder ham, so most probably when muslim asked some sindhi what country it is he must have replied Hindi des

preetamthakur के द्वारा
September 18, 2010

respected preetam thakur ji,it a costly and valueable quate,which gaves me a new topic for my further blog draft,i will immediatly presents the information content in my next blog related to the history and origin of word “Hindu” thanking You by Saima Malik Malik jee ! not only in quraan, Hindu word is not even in Veds, Geeta, Ramayan or Mhabhart. Could please find out where it originated ? and how? Many many thanks for your post.

malik saima के द्वारा
September 1, 2010

    A MASSAGE FROM ANNONYMS TO WHOM IT MAY CONCERN ================================================== specialy to shri Raj ji, ================= i am informing to all of you,that loves to my nation e.i. “INDIA” my mother land,and i always positive with my nation,and always try to reform for my nation with fully debotion,faith and honesty. after that comes my religion,i think there is no one religion have negative aspact,every religion goes with humenity,social justice,peace and powerty.there is no one religion is poor than other.it is our deuties to makes respect with all of religions. i also think that creature not create any thing in this word,which have no means,importancy,useless,every have imported according to conditions and demants.

Raj के द्वारा
September 1, 2010

मालिक सैमाजी, किया मैं पूछ सकता हूँ आप मेरे दुवारा किया गया कमेन्ट कियो नहीं छाप देते. मुसलमान होने के नाते आप को किसे चीज़ का डर ?.. मैं तो बस जानना चाह था की आज समाज की हर जयादातर बुराई के जड़ मैं सिर्फ और सिर्फ कियो कुरान को मानने वाले है ?. किर्पया जवाब दे. जय हिंद, वन्दे मातरम. dear raj jee,after the observation of your quote,i am sure,that you are so intelligancy and skills,but you have not makes clear your thought,you are not able to express,as you wants to say. now about come to your question,i am remebering a scene of film “mohabbate”,in which Amitabh Bachan is standing at “Gurukul” and Shahrukh Khan is present to excuse- Shahrukh said to Amitabh- magar jahan se mai dekh raha hoon,wahan se ek baap apni beti ke kadmon me khara (from where i am standing,it seems,a father is stands under the feet of his daughter) ================================================================================= raj ji,it is depent to observer,to which angle he have seen,and how to percept he.perception makes a view about your thinking and ideas. if a obser be a “Hitler” then he percept,that the yahoodi is responsible for each every nigative approach,dirty work,and poorty,he thoughts in the day light this and he seens dreams about these yahoodi’s. if an obserber is Americans- then he percept,that indian intelligency and youths are holds a lot of chance of employement’s,and future american youth can be go backward. and an american’s can be think- that all the petrolium mines will be safe,when these was under the custody of america,and america have maturnal owners of all natural resources in ech every country. and an emricans can be thinks- all the petrolium resources are under the muslims ownership,its not right. so it is your opinion,its your thought,but it is not prooved by evidance. and i am asking you

Raj के द्वारा
September 1, 2010

बहुत खूब मालिक सहिमाजी, सबसे पहले तो बहुत बहुत शुक्रिया इस खुबसूरत जानकारी के लिए.आप एक नोर्मल मुस्लिम हिन्दुस्तानी जान पड़ते है. अगर आप की बाते सचमुच सही है, तो कियो नहीं बतलाते दुनिया को, आप की जानकारी के लिए (चाहे तो आप खुद इसकी जानकारी ले सकते है अपने तरीके से ) इस समाज में आज जितनी भी बुराई है कही ना कही उसकी जड़ मैं आप किसी ना किसी मुस्लिम को ही ( मुस्लिम को ही पायेगे) ऐसा कियो है ? एक बार फिर आप की कुरान के बारे में इस महत्पुरव जानकारी के लिए तहे दिल से धन्यवाद् . आप के जवाब के इंतजार में (समाज में बुराई) के बारे में. जय हिंद. वन्देमातरम.

आर.एन. शाही के द्वारा
September 1, 2010

आपके लिखने के तरीक़े और विवेचना शैली की तारीफ़ किये बिना नहीं रहा जा सकता सैमा जी । kripya shahi ji ,aap ke comments aur lekh sachmuch prernatmak evam kotiparak hain,saath hi aapke dwara aajkal ki vichaardhara ke itar,dharm aur jaati ko pare rakh,kisi vindu par tathyatmak evam aalochnatmak parantu nishpaksh vichaar karna nishchay hi sarahniy hai,mai aapke vichaaron ka poorn samman karta hoon,aur aapko sadhuvaad deta hoon. aaj bharat ko aisi hi soch,aur drishtikon ki zaroorat hai,tabhi ek vrahattar bharat ke sapne ko kaarger kiya ja sakta hai,aur ek sarv gun sampann rashtr ka sapna saarthak ho sakta hai.thanks

akhlaq के द्वारा
September 1, 2010

     वास्तव में इस्लाम और कुरान के विरुद्ध झूठा दुष्प्रचार कुछ लोगों के द्वारा किया जा रहा है,और ऐसे लोगों को वास्तविकता से साक्षात् कराने में आपका लेख सफल है,

RASHID के द्वारा
September 1, 2010

We are always with you…………

saima malik के द्वारा
August 31, 2010

ghar se masjid hai bahut door to chalo yun kar len kisi rotey hue bachchey ko hansaya jaye (a song of film tamanna,directed by mahesh bhatt) bojh bhaari hai baston ka bahut usmen kuch phool bhi daale jayen i am so thankful all of you,for your kindly quote on my blogs,i am also thankful to all of you for giving your valueable time for my blogs.please give same support in future also.i think it will be continued. thanking you by saima malik

Rashid के द्वारा
August 31, 2010

बहुत अच्छे जनाब,, शायद मनोज मयंक की नफरत भरी बुध्धि कुछ खुले, वैसे इन जैसे लोगो में सुधार होना मुश्किल ही होता है, यह लोग सिर्फ और सिर्फ नफरत फैलाना चाहते है और देश के असली दुश्मन यही लोग है,, मैंने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था की कुरान में हिन्दू शब्द का प्रयोग है ही नहीं,, इस के अलावा मनोज मायक जैसे ४ /५ लोग और है जो अपने कमेंट्स से इस आग को हवा दे रहे है ,, कोई मुसलमानों को ३०% बता रहा है , कोई हज़ारो यादवो के मारे जाने की खबर दे रहा है , कोई कह रहा है की एक मोलवी का नाम बताओ जिसने आतंकवाद के खिलाफ फतवा दिया हो ,, अरे भाई इन्टरनेट है खुद ही चेक कर लो,, कितना झूठ लिखोगे ,, जनता बेवकूफ नहीं है … सच तो यह है की इस्लाम का भारत से एक ख़ास रिश्ता रहा है जो मैंने अपने लेख \"इस्लाम का भारत से रिश्ता \" में लिखा है.. मलिक जी आप को शत शत नमन राशिद http://rashid.jagranjunction.com

Abuzar osmani के द्वारा
August 31, 2010

Well Written ……. thanks

Abuzar osmani के द्वारा
August 31, 2010

बहुत खूब लिखा ……..अभी और भी ज़रुरत है शुक्रिया

Abuzar osmani के द्वारा
August 31, 2010

मालिक भाई आपने बिलकुल दुरुस्त लिखा………मैं ने भी वो तीनो पोस्ट पढ़े,दिल में आया की उनका जवाब एक सिलसिलेवार पोस्ट में दिया जाये की जो आयतें वो पेश कर रहे हैं वो बीच में से उठा कर लिखी गयी है ….और फिर उन आयातों का सही मतलब बताया जाये……..बहर हाल ये आपका पोस्ट काफी मालूमाती था शुक्रिया

jalal के द्वारा
August 31, 2010

जी नहीं इसमें कहीं कोई गलती नहीं दिखती. यह सही है की कुरान कें कही पर भी हिन्दू नामक शब्द हैं ही नहीं. और न ही हिन्दू को लेकर उसमें कुछ कहा गया है. लेकिन फिर भी लोग नहीं समझते हैं. और हर बार वोही गलत बात दुहराते हैं. इस तरह खुद तो गलत कर रहे हैं और दूसरों के दिलों में भी नफरत पैदा कर रहे हैं. इसी लिए मैंने शुरू से यही कहा की पूरी जानकारी लेनी हो तो कोई भी इसके जानकार के पास जा कर ले सकता है. ऐसे कहीं से भी एक दो आयत उठा कर सुनाते फिरने से मतलब यहाँ का वहां हो जाएगा. और आपका तहे दिल से शुक्रिया जो आपने लोगों तक यह बात फैलाई.


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