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धार्मिक स्थानों और कार्यक्रमों में लाउडस्पीकर प्रयोग पर रोक लगनी चाहिए

Posted On: 23 Jul, 2014 लोकल टिकेट में

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ये सत्य है के हमारा संविधान “प्रत्येक धर्म को अपनाने और पूजने” की पूर्ण स्वतंत्रता देता है,और हमें धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी स्वतंत्रता देता है.परन्तु वर्तमान में धर्म की ओट में कुछ अनैतिक और विघटनकारी कार्य और परम्पराएँ प्रारम्भ कर दी गयी,जो किसी के हिट में भी नहीं हैं,और न ही किसी भी धार्मिक दृष्टिकोण से आवश्यक और अनिवार्य हैं. मंदिरों,मस्जिदों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग अर्थात लाउडस्पीकर का प्रयोग भी एक ऐसी ही अनावश्यक और विघटनकारी परंपरा है.लाउडस्पीकर के प्रयोग और लगाने या हटाने पर अक्सर देश में कई जगह तनाव,उप्द्रप,हिंसा और यहां तक की दंगों को भी जन्म देता है.हाल ही में मुरादाबाद में घाटी घटना इसका ज्वलंत उदाहरण है,जिसमें वहां के जिलाधिकारी की एकल आँख भी चोटिल हो गयी,और पुलिस को बल प्रयोग कर भीड़ को भगाना पड़ा.


पूजा बिना लाउडस्पीकर के हो सकती है,नमाज़ बिना लाउडस्पीकर के पड़ी जा सकती है…………….और ऐसा हजारों वर्षों से चला आ रहा है,पर कुछ एक वर्षों में लाउडस्पीकर का प्रयोग इतना बड़ा की ये धर्म का अनिवार्य अंग बन गया.जबकि धर्म और आस्था से इसका कोई लेना देना नहीं है. अत सरकार को धार्मिक कार्यों में लाउडस्पीकर के प्रयोग पर रोक लगा देनी चाहिए…….आपकी क्या राय है …………….अपने विचार अवश्य bataayen

आजकल तो धर्मस्थलों और उसके मानने वालों में आपसी होड़ लग गयी है,किसके लाउडस्पीकर की आवाज़ ज़्यादा तेज़ है……मंदिर में अगर दो घंटा लाउडस्पीकर बजे तो मस्जिद में चार घंटे………मंदिर का पुजारी अगर रात दो बजे आरती चालु कर दे,तो कोई आश्चर्य नहीं की मस्जिद से १२ बजे ही कुरआन सुनाई पड़ने लगे……..ये किसी को मतलब नहीं …कब क्या बज रहा है…..सुनता कौन है…….बस बजना चाहिए ……..मंदिर पर अगर दो लाउडस्पीकर लगे तो मस्जिद पर तीन लग्न ज़रूरी हो गया है………..ये पूजा नहीं अंधी दौड़ है….जिसमे हर कोई जीतना चाहता है…………सबकी भावनाएं बस इसी से जुडी है.धर्मों को नौटंकी बना दिया है……………..और भगबान दीन-हीन……जिसने साड़ी सृष्टि का निर्माण किया……उसके लिए ये पापी घर बनाते है…….भगबान का घर……..पाखंडी कहीं के.

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ausaf malik के द्वारा
July 24, 2014

धन्यवाद दुवे जी वास्तव में आज भारत के लिए समय आ गया है,कि कुछ ठोस और परिणामकारी निर्णय लिए जाए……………..तभी भारत समय के साथ साथ अपनी महत्ता और शक्ति को प्रदर्शित कर सकता है. भारत के विकास में धर्म (वास्तव में अधर्म) सबसे बड़ी बाधा रहा है,ये कड़वी सच्चाई है,धर्म के नाम पर जाने कौन कौन सी परम्पराएँ,क्रय कलाप खोज लिए लिए हैं लोगों ने……जिनका वास्तविक धर्म से कोई लेना देना नहीं है……….सरकार,प्रशासन और पुलिस के अमूल्य समय का बहुत बड़ा भाग धार्मिक आयोजनों और धार्मिक उप्द्रपों को सुल्ताने में खर्च होता है…………..ये बर्वादी रोकनी ही होगी हमें .

pkdubey के द्वारा
July 23, 2014

मैं आप से सहमत हूँ | कुछ ध्वनिप्रदूषण कम होगा | और भगवान हमारी मौन प्रार्थना को ज्यादा जल्दी सुनता है |


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